विजय कंस्ट्रक्शन में श्रमिकों का हो रहा शोषण, विंध्यनगर,शक्तिनगर,रिहंदनगर सहित अन्य प्रोजेक्टो में चल रहा काम
मजदूरों को राजनीतिक पकड़ का मिलता है धौंस,हैरान-परेशान श्रमिक डर से नही कर रहे शिकायत...लेकिन दे रहे बद्दुआएं
अनोखी आवाज़ न्यूज़ (जनता की आवाज़-9827684220)
“दुर्बल को ना सताइये, वां की मोटी हाय|
बिना साँस की चाम से, लोह भसम होई जाय" |
परिस्थितियों के अनुसार कोई भी व्यक्ति दुर्बल हो सकता है उसको परेशान नहीं करना चाहिए ऐसे लोगों की बद्दुआ बहुत खतरनाक होती है। जैसे लोहार की धोंकनी का चमड़ा निर्जीव होते हुए भी लौहे को भस्म कर देता है।
स्वर्गीय नर्वदेश्वर तिवारी के मेहनत,लगन समपर्ण,त्याग के बलबूते आज एनटीपीसी सहित तमाम स्थानों पर सिविल का काम करने वाली विजय कंस्ट्रक्शन का बताया जाता है लाखो-करोड़ो का टर्नओवर है,लेकिन वह टर्नओवर किस काम का जब मजदूरों का मजदूरी भी समय से ना मिल सके और महीने-साल काम करने के बाद मजदूरी पाने के लिए श्रमिक को थाना-पुलिस, कोर्ट-वकील ,श्रम न्यायालय, मीडिया के चक्कर लगाने पड़े।
मामला एनटीपीसी विंध्यनगर से जुड़ा हुआ है जहां सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सिविल का काम करने वाली विजय कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कई मजदूरों से काम कराने के बाद भी उनका पारिश्रमिक नहीं दिया जा रहा है बल्कि उन्हें उच्च राजनीति पकड़ का धौंस देकर डराया जा रहा है। जिससे डरे सहमे श्रमिक शिकायत करने में भी सोंच रहे हैं एक श्रमिक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि विंध्यनगर साइट इंचार्ज व प्रोजेक्ट इंचार्ज अश्वनी पाण्डेय की मनमानियों के कारण विजय कंस्ट्रक्शन बदनाम हो रही है। आगे बताया कि महीने भर काम करने के बाद भी पारिश्रमिक नहीं दिया जाता है जब कोई व्यक्ति मांगता है तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है साथ ही यह कहा जाता है कि कंपनी की उच्च राजनीति पकड़ है जहां शिकायत करनी हो जाओ कर लो कुछ नहीं होने वाला।
बिना पारिश्रमिक दिए जलील कर काम से कर दिया जाता है अलग
विजय कंस्ट्रक्शन में काम करने वाले लोगों से फोन पर बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि कंपनी का देख रेख अश्वनी पाण्डेय करते हैं और वह अपनी मनमानी और अड़ियल रवैए के कारण आए दिन सुर्खियों में बने रहते हैं। महीना बीतने के बाद जब हम लोग अपना पारिश्रमिक मांगते हैं तो उनके द्वारा पहले टालमटोल किया जाता है और यदि हम लोग पैसे के लिये अड़े रहते है तो बिना बताए,बिना नोटिस दिए काम से अलग कर दिया जाता है और पैसे भी नहीं दिए जाते हैं साथ ही अभद्र पूर्ण तरीके से बर्ताव करते हुए धमकाया जाता है कि जहां शिकायत करनी हो कर लो कुछ नहीं होने वाला। बेचारे डरे सहमे श्रमिक शिकायत कर कोर्ट कचरी के चक्कर मे नही पड़ते जिस कारण अश्वनी पाण्डेय जैसे लोगो का मनोबल बढ़ा हुआ है। लेकिन एक बात उन्हें भी समझनी चाहिए गरीबों की आह!! बहुत खतरनाक होती है।
विजय कंस्ट्रक्शन की साख दांव पर, श्रमिक दे रहे बस बदुआएं
विजय कंस्ट्रक्शन की नीव रखने वाले स्वर्गीय वदेश्वर तिवारी भी आज स्वर्ग से अपने कंपनी व कर्मचारियों की कार्यप्रणाली देखकर हैरान होंगे कि हमने किस तरह से खून पसीने के दम पर इतना बड़ा फर्म खड़ा किया था और आज उस फर्म का यह हाल हो रहा है। जिस श्रमिक के दम पर कम समय मे विजय कंस्ट्रक्शन कहा से कहा पहुच गया आज उसी श्रमिक की ऐसी दुर्दशा है। मजदूरों के बताए अनुसार पर्दे के पीछे से पूरा खेल अश्वनी पांडेय खेलते है और पूरी जानकारी अपने मालिक को भी नही बताते लिहाजा मजदूर अपना पारिश्रमिक पाने के लिए ऑफिस कार्यालय के चक्कर लगाते रहता है और अंत में परेशान होकर वह पैसे को भूल जाता है। जिससे अश्वनी पांडे जैसे लोगों की तो चांदी है लेकिन विजय कंस्ट्रक्शन की साख निश्चित तौर पर दांव पर लगी हुई है।
इनका कहना है-
उक्त पूरे मामले की जानकारी के लिए जब विजय कंस्ट्रक्शन के संचालक अजीत तिवारी को मोबाइल नंबर 9005986909 पर सम्पर्क किया गया तो कोई जबाब नही आया।
साइड इंचार्ज एवं प्रोजेक्ट इंचार्ज विंध्यनगर अश्वनी पाण्डेय से जब पूरे मामले के बारे मे जानकारी दी गई और बताया गया तो उनका कहना है कि " ठीक है जो लिखना हो लिख दीजिये" मोबाइल नंबर- 8887749012
शेष अगले अंक में--